संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पैटर्न को 2015 से संशोधित किया है। जो की वर्तमान में, 7 + 2 = 9 पेपर हैं। इनमें प्रत्येक पेपर वर्णनात्मक प्रकार का है। आपको ज्ञात होगा की प्रमुख परीक्षा से पहले आपको दो सामान्य अध्ययन पेपर क्वालीफाइ करने होते हैं जिसमें आपको वैकल्पिक प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं जिनके अंक मुख्य परीक्षा में नहीं जोड़े जाते वह सिर्फ क्वालीफाइंग पेपर होते हैं | तथा मुख्य परीक्षा जिसमें दो वैकल्पिक प्रश्न पत्र होते हैं जिसमें प्रथम किसी एक भारतीय भाषा (Indian Language) अथवा अंग्रेजी, दूसरा कोई एक वैकल्पिक विषय जोकि प्रत्येक 300 अंक के होते हैं, ये भी अंक मुख्य परीक्षा में नहीं गिने जाते हैं। अभ्यर्थी अंग्रेजी में या संविधान की आठवीं अनुसूची से किसी एक भाषा को परीक्षा लिखने के माध्यम के रूप में चुन सकता हैं।
UPSC CSE Mains Law syllabus in Hindi (विधि)
इस लेख में हम आपको सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के विषय विधि के पेपर 1 व पेपर 2 के पाठ्यक्रम को हिंदी भाषा में बतायेंगे | विधि एक प्रमुख विषय है जिससे संबंधित कई प्रश्न आते हैं, इसको गहनता से ध्यान पूर्वक पढ़ें:
संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा विधि पेपर – 1 पाठ्यक्रम
सांविधिक एवं प्रशासनिक विधि:
- साँवधान एवं साँवधानवाद; सविधान के सुस्पष्ट लक्षण ।
- मूल अधिकार-लोकहित याचिका, विधिक सहायता, विधिक सेवा प्राधिकरण ।
- मूल अधिकार-निदेशक तत्व तथा मूल कर्तव्यों के बीच | संबंध ।
- राष्ट्रपति को संवैधानिक स्थिति तथा मत्रपरिषद् के साथ संबंध ।
- राज्यपाल तथा उसकी शक्तियां ।
- उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय :
(क) नियुक्ति तथा स्थानांतरण ।
(ख) शक्तियां, कार्य एवं अधिकारिता ।
- केंद्र, राज्य एवं स्थानीय निकाय;
(क) संघ तथा राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण ।
(ख) स्थानीय निकाय ।
(ग) संघ, राज्यों तथा स्थानीय निकायों के बीच प्रशासनिक संबंध ।
(घ) सर्वोपरि अधिकार राज्य संपत्ति-सामान्य संपत्ति-समुदाय संपत्ति ।
- विधायी शक्तियों, विशेषाधिकार एवं उन्मुक्ति ।
- संघ एवं राज्य के अधीन सेवाएं :
(क) भर्ती एवं सेवा शर्ते : सावधानिक सुरक्षा; प्रशासनिक अधिकरण ।
(ख) संघ लोक सेवा आयोग एवं लोक सेवा आयोग-शक्ति एवं कार्य ।
(ग) निर्वाचन आयोग-शक्ति एवं कार्य । 10. आपात् उपबंध ।
- सविधान संशोधन ।
- नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत-आविर्भूव होती प्रवृतियाँ एवं न्यायिक उपागम् ।
- प्रत्यायोजित विधान एवं इसकी सॉवधानिकता ।
- शक्तियों एवं सावधानिक शासन का पृथक्करण।
- प्रशासनिक कार्रवाई का न्यायिक पुनर्विलोकन ।
- ओम्बड्समैन: लोकायुक्त, लोकपाल आदि ।
अंतर्राष्ट्रीय विधि:
- अंतर्राष्ट्रीय विधि की प्रकृति तथा परिभाषा ।
- अंतर्राष्ट्रीय विधि तथा राष्ट्रीय विधि के बीच संबंध ।
- राज्य मान्यता तथा राज्य उत्तराधिकार ।
- समुद्र नियम : अंतर्देशीय जलमार्ग, क्षेत्रीय समुद्र, समीपस्थ परिक्षेत्र, महाद्वीपीय उपतट, अनन्य आर्थिक परिक्षेत्र तथा महासमुद्र ।
- व्यक्ति : राष्ट्रीयता, राज्यहीनता-मानवाधिकार तथा उनके प्रवर्तन के लिए उपलब्ध प्रक्रियाएं।
- राज्यों की क्षेत्रीय अधिकारिता-प्रत्यर्पण तथा शरण ।
- सधयां : निर्माण, उपयोजन, पर्यवसान और आरक्षण ।
- संयुक्त राष्ट्र : इसके प्रमुख अंग, शक्तियां कृत्य और सुधार ।
- विवादों का शांतिपूर्ण निपटारा : विभिन्न तरीके।
- बल का विधिपूर्ण आश्रय : आक्रमण, आत्मरक्षा, हस्तक्षेप ।
- अंतर्राष्ट्रीय मानवादी विधि के मूल सिद्धांत-अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन एवं समकालीन विकास ।
- परमाणु अस्त्रों के प्रयोग की वैधता; परमाणु अस्त्रों के परीक्षण पर रोक – परमाणवीय अप्रसार सधि, सी.टी.बी.टी. ।
- अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, राज्यप्रवर्तित आंतकवाद, अपहरण, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ।
- नए अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक आदेश तथा मौद्रिक विधि, डब्ल्यू टी ओ, टीआरआईपीएस, जीएटीटी, आईएमएफ, विश्व बैंक।
- मानव पर्यावरण का संरक्षण तथा सुधार अंतर्राष्ट्रीय प्रयास ।
संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा विधि पेपर – 1 पाठ्यक्रम
अपराध विधि:
- आपराधिक दायित्व के सामान्य सिद्धांत; आपराधिक | मन:स्थिति तथा आपराधिक कार्य । साविधिक अपराधों में आपराधिक मन:स्थिति।
- दंड के प्रकार एवं नई प्रवृत्तियाँ जैसे कि मृत्यु दंड उन्मूलन
- तैयारियां तथा आपराधिक प्रयास
- सामान्य अपवाद
- संयुक्त तथा रचनात्मक दायित्व
- दुष्प्रेरण
- आपराधिक षडयंत्र
- राज्य के प्रति अपराध
- लोक शांति के प्रति अपराध
- मानव शरीर के प्रति अपराध
- संपत्ति के प्रति अपराध
- स्त्री के प्रति अपराध
- मानहानि
- भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988
- सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 एवं उत्तरवर्ती विधायी विकास ।
- अभिवचन सौदा
अपकृत्य विधि:
- प्रकृति तथा परिभाषा
- त्रुटि तथा कठोर दायित्व पर आधारित दायित्व; आत्यंतिक दायित्व।
- प्रतिनिधिक दायित्व, राज्य दायित्व सहित
- सामान्य प्रतिरक्षा
- संयुक्त अपकृत्य कर्ता
- उपचार
- उपेक्षा
- मानहानि
- उत्पात (न्यूसेंस)
- घड्यंत्र
- अप्राधिकृत बंदीकरण
- विद्वेषपूर्ण अभियोजन ।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 ।
संविदा विधि और वाणिज्यिक विधि :
- संविदा का स्वरूप और निर्माण/ई सवदा
- स्वतंत्र सम्मति को दूषित करने वाले कारक
- शून्य शून्यकरणीय, अवैध तथा अप्रवर्तनीय करार
- संविदा का पालन तथा उन्मोचन
- सविदाकल्प
- संविदा भंग के परिणाम
- क्षतिपूर्ति, गारंटी एवं बीमा सविदा
- अभिकरण संविदा
- माल की बिक्री तथा अवक्रय (हायर परचेज)
- भागीदारी का निर्माण तथा विघटन
- परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881
- माध्यस्थम् तथा सुलह अधिनियम, 1996
- मानक रूप सविदा
समकालीन विधिक विकास:
- लोकहित याचिका
- बौद्धिक संपदा अधिकार-संकल्पना, प्रकार/संभावनाएं।
- सूचना प्रौद्योगिकी विधि, जिसमें साइबर विधियां शामिल हैं, संकल्पना, प्रयोजप/संभावनाएं ।
- प्रतियोगिता विधि संकल्पना, प्रयोग/संभावनाएं।
- वैकल्पिक विवाद समाधान-संकल्पना, प्रकार/संभावनाएं।
- पर्यावरणीय विधि से संबधित प्रमुख कानून ।
- सूचना का अधिकार अधिनियम ।
- संचार माध्यमों (मीडिया) द्वारा विचारण।
अभी आपने संघ लोक सेवा आयोग प्रमुख परीक्षा के विधि को पढ़ा, यदि आपको इससे सम्बंधित कोई भी प्रश्न हो तो Comment Box में जाकर पूछ सकते हैं, और आप हमारे Free IAS Prelims Quiz को Attempt कर सकते हैं जिसके द्वारा आप अपनी तैयारियों को परख सकते हैं |
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