संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पैटर्न को 2015 से संशोधित किया है। जो की वर्तमान में, 7 + 2 = 9 पेपर हैं। इनमें प्रत्येक पेपर वर्णनात्मक प्रकार का है। इसमें दो क्वालीफाइंग पेपर हैं – कोई भी भारतीय भाषा (Indian Language) व अंग्रेजी, प्रत्येक के 300 अंक हैं। किसी भी तरह, ये अंक मुख्य परीक्षा में नहीं गिने जाते हैं। अभ्यर्थी अंग्रेजी में या संविधान की आठवीं अनुसूची से किसी एक भाषा को परीक्षा लिखने के माध्यम के रूप में चुन सकता हैं।
UPSC CSE Mains Economics syllabus in Hindi (अर्थशास्त्र)
इस लेख में हम आपको सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के विषय अर्थशास्त्र के पेपर 1 व पेपर 2 के पाठ्यक्रम को हिंदी भाषा में बतायेंगे | अर्थशास्त्र एक प्रमुख विषय है जिससे संबंधित कई प्रश्न आते हैं, इसलिए इस विषय को ध्यान पूर्वक पढ़ें:
संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा अर्थशास्त्र पेपर – 1 पाठ्यक्रम
- उन्नत व्यष्टि अर्थशास्त्र
(क) कीमत निर्धारण के मार्शलियन एवं वालरासियम उपागम् ।
(ख) वैकल्पिक वितरण सिद्धांत: रिकार्डी, काल्डोर, कलीकी ।
(ग) बाजार संरचना: एकाधिकारी प्रतियोगिता, द्विअधिकार, अल्पाधिकार ।
(घ) आधुनिक कल्याण मानदंड: परेटी हिक्स एवं सितोवस्की, ऐरो का असंभावना प्रमेय, ए. के. सेन का सामाजिक कल्याण फलन ।
- उन्नत समष्टि अर्थशास्त्र
नियोजन आय एवं व्याज दर निर्धारण के उपागम: क्लासिकी, कीन्स (IS-LM) वक, नवक्लासिकी संश्लेषण एवं नया क्लासिकी, ब्याज दर निर्धारण एवं ब्याज दर संरचना के सिद्धांत ।
- मुदा बैंकिंग एवं वित्त:
(क) मुद्रा की मांग और पूर्ति: मुद्रा का मुद्रा गुणक मात्रा सिद्धांत (फिशर, पीक एवं फ्राइडमैन) तथा कीन का मुद्रा के लिए मांग का सिद्धांत, बंद और खुली अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रा प्रबंधन के लक्ष्य एवं साधन । केन्द्रीय बैंक और खजाने के बीच संबंध मुद्रा की वृद्धि दर पर उच्चतम सीमा का प्रस्ताव ।
(ख) लोक वित्त और बाजार अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका: पूर्ति के स्थिरीकरण में, संसाधनों का विनिधान और वितरण और संवृद्धि सरकारी राजस्व के स्रोत, करों एवं उपदानों के रूप, उनका भार एवं प्रभाव कराधान की सीमाएं, ऋण, क्राउडिंग आउट प्रभाव एवं ऋण लेने की सीमाएं लोक व्यय एवं इसके प्रभाव ।
- अन्तर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र
(क) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के पुराने और नए सिद्धांत:
(i) तुलनात्मक लाभ,
(ii) व्यापार शर्ते एवं प्रस्ताव वक्र,
(ii) उत्पाद चक्र एवं निर्णायक व्यापार सिद्धांत,
(iv) व्यापार, संवृद्धि के चालक के रूप में और खुली अर्थव्यवस्था में अवविकास के सिद्धांत ।
(ख) संरक्षण के स्वरूप: टैरिफ एवं कोटा ।
(ग) भुगतान शेष समायोजन: वैकल्पिक उपागम:
(i) कीमत बनाम आय, नियत विनिमय दर के अधीन आय के समायोजन ।
(ii) मिश्रित नीति के सिद्धांत ।
(ii) पूंजी चलिष्णुता के अधीन विनिमय दर समायोजन ।
(iv) विकासशील देशों के लिए तिरती दरें और उनकी विवक्षा, मुद्रा (करेंसी) बोर्ड ।
(v) व्यापार नीति एवं विकासशील देश ।
(vi) BOP खुली अर्थव्यवस्था समष्टि मॉडल में समायोजन तथा नीति समन्वय ।
(vii) सट्टा ।
(viii) व्यापार गुट एवं मौद्रिक संघ ।
(ix) विश्व व्यापार संगठन (WTO): TRIM, TRIPS, घरेलू उपाय WTO बातचीत के विभिन्न चक्र ।
- संवृद्धि एवं विकास
(क) (i) संवृद्धि के सिद्धांत: हैरड का मॉडल ।
(ii) अधिशेष श्रमिक के साथ विकास का ल्यूइस मॉडल ।
(iii) संतुलित एवं असंतुलित संवृद्धि ।
(iv) मानव पूंजी एवं आर्थिक वृद्धि।
(ख) कम विकसित देशों को आर्थिक विकास का प्रक्रम: आर्थिक विकास एवं संरचना परिवर्तन के विषय में मिर्डल एवं कुजमेंटस: कम विकसित देशों के आर्थिक विकास में कृषि की भूमिका ।
(ग) आर्थिक विकास तथा अंतर्राष्ट्रीय एवं निवेश, बहुराष्ट्रीयों की भूमिका ।
(घ) आयोजना एवं आर्थिक विकास: बाजार की बदलती भूमिका एवं आयोजना, निजी-सरकारी साझेदारी ।
(ङ) कल्याण संकेतक एवं वृद्धि के माप-मानव विकास के सूचक आधारभूत आवश्यकताओं का उपागम् ।
(च) विकास एवं पर्यावरणी धारणीयता-पुनर्नवीकरणीय एवं अपुनर्नवीकरणीय संसाधन, पर्यावरणी अपकर्ष अंतर-पीढ़ी इक्विटी विकास ।
संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा अर्थशास्त्र पेपर – 2 पाठ्यक्रम
- स्वतंत्रता पूर्व युग में भारतीय अर्थव्यवस्था: भूमि प्रणाली एवं इसके परिवर्तन, कृषि का वाणिज्यिीकरण, अपवहन सिद्धांत, अबंधता सिद्धांत एवं समालोचना निर्माण एवं परिवहन : जूट कपास, रेलवे, मुद्रा एवं साख ।
- स्वतंत्रता के पश्चात् भारतीय अर्थव्यवस्था:
क. उदारीकरण के पूर्व का युग:
(i) वकील, गाइगिल एवं वी. के. आर. वी. राव के योगदान ।
(ii) कृषि: भूमि सुधार एवं भूमि पट्टा प्रणाली, हरित क्रांति एवं कृषि में पूंजी निर्माण ।
(iii) संघटन एवं संवृद्धि में व्यापार प्रवृत्तियां, सरकारी एवं निजी क्षेत्रों की भूमिका, लघु एवं कुटीर उद्योग ।
(iv) राष्ट्रीय एवं प्रतिव्यक्ति आय: स्वरूप, प्रवृत्तियां, सकल एवं क्षेत्रीय संघटन तथा उनमें परिवर्तन ।
(v) राष्ट्रीय आय एवं वितरण को निर्धारित करने वाले स्थूल कारक, गरीबी के माप, गरीबी एवं असमानता में प्रवृत्तियां ।
ख. उदारीकरण के पश्चात् का युग:
(i) नया आर्थिक सुधार एवं कृषि: कृषि एवं WTO, खाद्य प्रसंस्करण, उपदान, कृषि कीमतें एवं जन वितरण प्रणाली, कृषि संवृद्धि पर लोक व्यय का समाघात ।
(ii) नई आर्थिक नीति एवं उद्योग: औद्योगिकीरण निजीकरण, विनिवेश की कार्य नीति, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तथा बहुराष्ट्रीय की भूमिका ।
(iii) नई आर्थिक नीति एवं व्यापार: बौद्धिक संपदा अधिकार : TRIPS, TRIMS, GATS तथा NEW EXIM नीति की विवक्षाएं।
(iv) राष्ट्रीय एवं प्रतिव्यक्ति आय: स्वरूप, प्रवृत्तियां, सकल एवं क्षेत्रीय संघटन तथा उनमें परिवर्तन ।
(v) राष्ट्रीय आय एवं वितरण को निर्धारित करने वाले स्थूल कारक, गरीबी के माप, गरीबी एवं असमानता में प्रवृत्तियां ।
ग. उदारीकरण के पश्चात् का युग:
(i) नया आर्थिक सुधार एवं कृषि: कृषि एवं WTO, खाद्य प्रसंस्करण, उपदान, कृषि कीमतें एवं जन वितरण प्रणाली, कृषि संवृद्धि पर लोक व्यय का समाघात ।
(ii) नई आर्थिक नीति एवं उद्योग: औद्योगिकीरण निजीकरण, विनिवेश की कार्य नीति, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तथा बहुराष्ट्रीयों की भूमिका ।
(iii) नई आर्थिक नीति एवं व्यापार: बौद्धिक संपदा अधिकार : TRIPS, TRIMS, GATS तथा NEW EXIM नीति की। विवक्षाएं।
(iv) नई विनिमय दर व्यवस्था: आंशिक एवं पूर्ण परिवर्तनीयता ।
(v) नई आर्थिक नीति एवं लोक वित्त: राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम, बारहवां वित्त आयोग एवं राजकोषीय संघवाद तथा राजकोषी समेकन ।
(vi) नई आर्थिक नीति एवं मौद्रिक प्रणाली: नई व्यवस्था में RBI की भूमिका ।
(vii) आयोजना: केन्द्रीय आयोजना से सांकेतिक आयोजना तक, विकेन्द्रीकृत आयोजना और संवृद्धि हेतु बाजार एवं आयोजना के बीच संबंध : 73वां एवं 74वां संविधान संशोधन ।
(viii) नई आर्थिक नीति एवं रोजगार: रोजगार एवं गरीबी, ग्रामीण मजदूरी, रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन योजनाएं, नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ।
UPSC CSE (IAS) Prelims Syllabus in Hindi – Read Here
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अभी आपने संघ लोक सेवा आयोग प्रमुख परीक्षा के अर्थशास्त्र विषय का पूर्ण पाठ्यक्रम पढ़ा, यदि आपको इससे सम्बंधित कोई भी प्रश्न हो तो Comment Box में जाकर पूछ सकते हैं |
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