संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पैटर्न को 2015 से संशोधित किया है। जो की वर्तमान में, 7 + 2 = 9 पेपर हैं। इनमें प्रत्येक पेपर वर्णनात्मक प्रकार का है। आपको ज्ञात होगा की प्रमुख परीक्षा से पहले आपको दो सामान्य अध्ययन पेपर क्वालीफाइ करने होते हैं जिसमें आपको वैकल्पिक प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं जिनके अंक मुख्य परीक्षा में नहीं जोड़े जाते वह सिर्फ क्वालीफाइंग पेपर होते हैं | तथा मुख्य परीक्षा जिसमें दो वैकल्पिक प्रश्न पत्र होते हैं जिसमें प्रथम किसी एक भारतीय भाषा (Indian Language) अथवा अंग्रेजी, दूसरा कोई एक वैकल्पिक विषय जोकि प्रत्येक 300 अंक के होते हैं, ये भी अंक मुख्य परीक्षा में नहीं गिने जाते हैं। अभ्यर्थी अंग्रेजी में या संविधान की आठवीं अनुसूची से किसी एक भाषा को परीक्षा लिखने के माध्यम के रूप में चुन सकता हैं।
UPSC CSE Mains Botany syllabus in Hindi (रसायन विज्ञान)
इस लेख में हम आपको सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के विषय वनस्पति विज्ञान के पेपर 1 व पेपर 2 के पाठ्यक्रम को हिंदी भाषा में बतायेंगे | वनस्पति विज्ञान एक प्रमुख विषय है जिससे संबंधित कई प्रश्न आते हैं, इसको गहनता से ध्यान पूर्वक पढ़ें:
संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा वनस्पति विज्ञान पेपर – 1 पाठ्यक्रम
-
सूक्ष्मजैविकी एवं पादपरोग विज्ञान:
विषाणु, वाइरॉइड, जीवाणु, फंगाई एवं माइकोप्लाज्मा संरचना एवं जनन । बहुगुणन । कृषि, उद्योग चिकित्सा तथा वायु एवं मृदा एवं जल में प्रदूषण नियंत्रण में सूक्ष्मजैविकी के अनुप्रयोग। प्रायोन एवं प्रायोन घटना।
विषाणुओं, जीवाणुओं, माइक्रोप्लाज्मा, फुगाई तथा सूत्रकृमियों द्वारा होने वाले प्रमुख पादप रोग । संक्रमण और फैलाव की विधियाँ । संक्रमण तथा रोग प्रतिरोध के आण्विक आधार । परजीविता की कार्यिकी और नियंत्रण के उपाय । कवक आविष । मॉडलन एवं रोग पूर्वानुमान, पादप संगरोध ।
-
क्रिप्टोगेम्स:
शैवाल, कवक, लाइकन, ब्रायोफाइट, टेरीडोफाइट संरचना और जनन के विकासात्मक पहलू । भारत में क्रिप्टोगेम्स का वितरण और उनका परिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व ।
-
पुष्पोभिद:
अनावृत बीजी : पूर्व अनावृत बीजी की अवधारणा । अनावृतबीजी का वर्गीकरण और वितरण । साइकैडेलीज, गिंगोऐजीज, कोनीफेरेलीज और नीटेलीज के मुख्य लक्षण, संरचना व जनन । साईकैडोफिलिकैलीज, बैन्नेटिटेलीज तथा काइँटेलीज का सामान्य वर्णन । भूवैज्ञानिक समयमापनी, जीवाश्मप्रकार एवं उनके अध्ययन की विधियाँ । आवृतबीजी : वर्गिकी, शारीरिकी, भ्रूणविज्ञान, परागाणुविज्ञान और जातिवृत । वर्गिकी सोपान, वानस्पतिक नामपद्धति के अंतर्राष्ट्रीय कूट, संख्यात्मक वर्गिकी एवं रसायन-वर्गिकी शारीरिकी, भ्रूण विज्ञान एवं परागाणु विज्ञान से साक्ष्य ।
आवृत बीजियों का उद्गम एवं विकास, आवृत बीजियों के वर्गीकरण की विभिन्न प्रणालियों का तुलनात्मक विवरण, आवृत बीजी कुलों का अध्ययन मैग्नोलिएसी, रैननकुलैसी, जैसीकेसी, रोजेसी, फेबेसी, यूफार्बिएसी, मालवेसी, डिप्टेरेकार्पेसी, एपिएसी, एस्क्लेपिडिएसी, वर्बिनेसी, सोलैनेसी, रूबिएसी, कुकुरबिटेली, ऐस्टीरेसी, पोएसी, ओरकेसी, लिलिएसी, म्यूजेसी एवं ऑकिडेसी । रंध्र एवं उनके प्रकार, ग्रंथीय एवं अग्रंथीय ट्राइकोम, विसंगत द्वितीयक वृद्धि, सी-3 और सी-4 पौधों का शरीर । जाइलम एवं फलोएम विभेदन, काष्ठ शरीर ।
नर और मादा युग्मकोदृभिद् का परिवर्धन, परागण, निषेचन । भ्रूणपोष- इसका परिवर्धन और कार्य । भ्रूण परिवर्धन के स्वरूप । बहुभ्रूणता, असंगजनन, परागाणु विज्ञान के अनुप्रयोग, परागभंडारण एवं टेस्ट ट्यूब निषेचन सहित प्रयोगात्मक भ्रूण विज्ञान ।
-
पादप संसाधन विकास:
पादप ग्राम्यन एवं परिचय, कृष्ट पौधों का उद्भव, उद्भव संबंधी वैवीलोव के केद्र, खाद्य, चारा, रेशों, मसालों, पेय पदार्थों, खाद्य तेलों, औषधियों, स्वापकों, कीटनाशियों, इमारती लकड़ी, गोंद, रेजिनों तथा रंजकों के स्रोतों के रूप में पौधे, लेटेक्स, सेलुलोस, मंड और उनके उत्पाद । इत्रसाजी । भारत के संदर्भ में नुकुलवनस्पतिकी का महत्व । ऊर्जा वृक्षरोपण, वानस्पतिक उद्यान और पादपालय ।
-
आकारजनन:
पूर्ण शक्तता, ध्रुवणता, सममिति और विभेदन । कोशिका, ऊतक, अंग एवं जीवद्रव्यक संवर्धन । कायिक संकर और द्रव्य संकर । माइक्रोप्रोपेगेशन, सोमाक्लोनल विविधता एवं इसका अनुप्रयोग, पराग अगुणित, अम्ब्रियोरेस्क्यु विधियाँ एवं उनके अनुप्रयोग।
संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा वनस्पति विज्ञान पेपर – 2 पाठ्यक्रम
-
कोशिका जैविकी:
कोशिका जैविकी की प्रविधियाँ । प्राक्केंद्रकी और सुकेंद्रकी कोशिकाएँ संरचनात्मक और परासंरचनात्मक बारीकियाँ । कोशिका बाह्य आधात्री अथवा कोशिकाबाह्य आव्यूह (कोशिका भित्ति) तथा झिल्लियों की संरचना और कार्य-कोशिका आसंजन, झिल्ली अभिगमन तथा आशयी अभिगमन । कोशिका अंगकों (हरित लवक सूत्रकणिकाएँ, ई आर, डिक्टियोसोम, राइबोसोम, अंत:काय, लयनकाय, परऑक्सीसोम) की संरचना और कार्य । साइटोस्केलेटन एवं माइक्रोट्यूब्यूल्स, केंद्रक, कद्रक, केंद्री रंध्र सम्मिश्र । क्रोमेटिन एवं न्यूक्लियोसोम । कोशिका संकेतन और कोशिकाग्राही । संकेत पारक्रमण । समसूत्रण और अर्धसूत्रण विभाजन, कोशिका चक्र का आण्विक आधार । गुणसूत्रों में संख्यात्मक और संरचनात्मक विभिन्नताएँ तथा उनका महत्व । क्रोमेटिन व्यवस्था एवं जीनोम संवेष्टन, पॉलिटीन गुणसूत्र, बी-गुणसूत्र-संरचना व्यवहार और महत्व ।
-
आनुवंशिकी, आण्विक जैविकी और विकास:
आनुवंशिकी का विकास और जीन बनाम युग्मविकल्पी अवधारणा (कूट विकल्पी), परिमाणात्मक आनुशकी तथा बहुकारक । अपूर्ण प्रभाविता, बहुजननिक वंशागति, बहुविकल्पी सहलग्नता तथा विनिमय आण्विक मानचित्र (मानचित्र प्रकार्य की अवधारण) सहित जीन मानचित्रण की विधियाँ । लिंग गुणसूत्र तथा लिंग सहलग्न वंशागति, लिंग निर्धारण और लिंग विभेदन का आण्विक आधार । उत्परिवर्तन (जैव रासायनिक और आण्विक आधार) कोशिकाद्रव्यी वंशागति एवं कोशिकाद्रव्यी जीन (नर बंध्यता की आनुशकी सहित)।
न्यूक्लीय अम्लों और प्रोटीनों की संरचना तथा संश्लेषण । अनुशक कुट और जीन अभिव्यक्ति का नियमन । जीन नीरवता, बहुजीन कुल, जैव विकास प्रमाण, क्रियाविधि तथा सिद्धांत । उद्भव तथा विकास में RNA की भूमिका ।
-
पादप प्रजनन, जैव प्रोद्योगिकी तथा जैव सांख्यिकी:
पादप प्रजनन की विधियाँ-आप्रवेश, चयन तथा संकरण । (वंशावली, प्रतीप संकर, सामूहिक चयन, व्यापक पद्धति) उत्परिवर्तन, बाहगणिता, नरबंध्यता तथा संकर ओज प्रजनन । पादप प्रजनन में असंगजनन का उपयोग । DNA अनुक्रमण, आनुर्वांशिक इंजीनियरी-जीन अंतरण की विधियाँ; पारजीनी सस्य एवं जैव सुरक्षा पहलू, पादप प्रजनन में आण्विक चिह्नक का विकास एवं उपयोग । उपकरण एवं तकनीक-प्रोब, दक्षिणी ब्लास्टिंग, DNA फिंगर प्रिंटिंग, PCR एवं FISH । मानक विचलन तथा विचरण गुणांक (सी बी), सार्थकता परीक्षण, (जैड़-परीक्षण, टी-परीक्षण तथा काई वर्ग परीक्षण) । प्रायिकता तथा बंटन (सामान्य, द्विपदी तथा स्वासों बंटन) संबंधन तथा समाश्रयण ।
-
शरीर क्रिया विज्ञान तथा जैव रसायनिकी:
जल संबंध, खनिज पोषण तथा आयन अभिगमन, खनिज न्यूनताएँ । प्रकाश संश्लेषण प्रकाश रसायनिक अभिक्रियाएँ, फोटो फोस्फोरिलेशन एवं कार्बन फिक्सेशन पाथवे, cgc, और कैम दिशामार्ग । फ्लोएम परिवहन की क्रियाविधि श्वसन (किण्वन सहित अवायुजीवीय और वायुजीवीय)-इलेक्ट्रॉन अभिगमन श्रृंखला और ऑक्सीकरणी फास्फोरिलेशन फोटो श्वसन, रसोपरासरणी सिद्धांत तथा ATP संश्लेषण । लिपिड उपापचय, नाईट्रोजन स्थिरीकरण एवं नाइट्रोजन उपापचय । किण्व, सहकिण्व, ऊर्जा अंवरण तथा ऊर्जा संरक्षण । द्वितीयक उपापचयजों का महत्व । प्रकाशग्राहियों के रूप में वर्णक (पलैस्टिडियल वर्णक तथा पादप वर्णक), पादप संचलन, दीप्तिकालिता तथा पुष्पन, वसंतीकरण, जीर्णन । वृद्धि पदार्थ उनकी रासायनिक प्रकृति, कृषि बागवानी में उनकी भूमिका और अनुप्रयोग, वृद्धिसंकेत, वृद्धिगतियाँ । प्रतिबल शारीरिकी (ताप, जल, लवणता, धातु) । फल एवं बीज शारीरिकी । बीजों की प्रसुप्ति, भंडारण तथा उनका अंकुरण । फल का पकना-इसका आण्विक आधार तथा मैनिपुलेशन ।
-
परिस्थितिकी तथा पादप भूगोल:
परितंत्र की संकल्पना, पारिस्थितिक कारक । समुदाय की अवधारणाएँ और गतिकी पादप अनुक्रमण । जीव मंडल की अवधारणा । पारितंत्र, संरक्षण । प्रदूषण और उसका नियंत्रण (फाइटोरेमिडिएशन सहित)। पादप सूचक, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम ।
भारत में वनों के प्रारूप-वनों का पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व । वनरोपण, वनोन्मूलन तथा सामाजिक वानिकी । संकटापन्न पौध, स्थानिकता, IUCN कोटियाँ, रेड डाटा बुक । जैव विविधता एवं उसका संरक्षण, संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क, जैव विविधता पर सम्मेलन, किसानों के अधिकार एवं बौद्धिक संपदा अधिकार, संपोषणीय विकास की संकल्पना, जैव-भू-रासायनिक चक्र, भूमंडलीय तापन एवं जलवायु परिवर्तन, संक्रामक जातियाँ, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, भारत के पादप भूगोलीय क्षेत्र ।
अभी आपने संघ लोक सेवा आयोग प्रमुख परीक्षा के वनस्पति विज्ञान पढ़ा, यदि आपको इससे सम्बंधित कोई भी प्रश्न हो तो Comment Box में जाकर पूछ सकते हैं, और आप हमारे Free IAS Prelims Quiz को Attempt कर सकते हैं जिसके द्वारा आप अपनी तैयारियों को परख सकते हैं |
Useful Test Courses / Study Material for UPSC IAS:
| UPSC IAS Prelims Test Series in Hindi – 10 Full-Length Test 10 Sectional Test |
| Ancient History Test Course in Hindi– 53 Chapter-wise Test |
| Medieval History Test Course in Hindi – Coming Soon |
| Modern History Test Course in Hindi and English – 59 Chapter-wise Test |
| Indian Polity Test Course in Hindi – 52 Chapter-wise Test |
| Indian & World Geography Test Course in Hindi & English – 54 Chapter-wise Test |
| Science Test Course in Hindi & English – 49 Chapter-wise Test |
| Environmental Studies Test Course in Hindi & English – 21 Chapter-wise Test |
UPSC IAS Mains Optional Subject Syllabus:







