संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पैटर्न को 2015 से संशोधित किया है। जो की वर्तमान में, 7 + 2 = 9 पेपर हैं। इनमें प्रत्येक पेपर वर्णनात्मक प्रकार का है। आपको ज्ञात हो प्रमुख परीक्षा से पहले आपको दो सामान्य अध्ययन पेपर क्वालीफाइ करने होते हैं उसके बाद आप IAS Mains की परीक्षा के लिए क्वालीफाई होते हैं| प्रमुख परीक्षा में दो क्वालीफाइंग पेपर होते हैं जिसमें – कोई भी भारतीय भाषा (Indian Language) व अंग्रेजी, प्रत्येक के 300 अंक हैं। किसी भी तरह, ये अंक मुख्य परीक्षा में नहीं गिने जाते हैं। अभ्यर्थी अंग्रेजी में या संविधान की आठवीं अनुसूची से किसी एक भाषा को परीक्षा लिखने के माध्यम के रूप में चुन सकता हैं।
UPSC CSE Mains Civil Engineering syllabus in Hindi (सिविल इंजीनियरी)
इस लेख में हम आपको सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के विषय सिविल इंजीनियरी के पेपर 1 व पेपर 2 के पाठ्यक्रम को हिंदी भाषा में बतायेंगे | सिविल इंजीनियरी एक प्रमुख विषय है जिससे संबंधित कई प्रश्न आते हैं, इसको गहनता से ध्यान पूर्वक पढ़ें:
संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा सिविल इंजीनियरी पेपर – 1 पाठ्यक्रम
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इंजीनियरी यांत्रिकी पदार्थ सामर्थ्य तथा संरचनात्मक विश्लेषण
1.1 इंजीनियरी यांत्रिकी: मात्रक तथा विमाएं, SI मात्रक, सदिश, बल की संकल्पना, कण तथा दृढ़ पिंड संकल्पना, संगामी, असंगामी तथा समतल पर समांतर बल, बल आघूर्ण, मुक्त पिंड आरेख, सप्रतिबंध साम्यावस्था, कल्पित कार्य का सिद्धांत, समतुल्य बल प्रणाली।
प्रथम तथा द्वितीय क्षेत्र आघूर्ण, द्रव्यमान जड़त्व आघूर्ण
स्थैतिक घर्षण :
शुद्धगमिकी तथा गतिकी: कार्तीय निर्देशांक शुद्धगतिकी समान तथा असमान त्वरण के अधीन गति गुरुत्वाधीन गति । कणगतिकी, संवेग तथा ऊर्जा सिद्धांत, प्रत्यास्थ पिंडों का संघट्न दृढ़ पिंडों का घूर्णन ।
1.2 पदार्थ-सामर्थ्य: सरल प्रतिबल तथा विकृति, प्रत्यास्थ स्थिरांक, अक्षत:भारित संपीडांग अपरूपर्ण बल तथा बंकन आघूर्ण, सरलबंकन का सिद्धांत, अनुप्रस्थ काट का अपरूपण प्रतिबल वितरण, समसामर्थ्य धरण।
धरण विक्षेप: मैकाले विधि, मोर की आघूर्ण क्षेत्र विधि, अनुरूप धरण विधि, एकांक भार विधि, शाफ्ट की ऐंठन, स्तंभों का प्रत्यास्थ स्थायित्व । आयलर, रेनकाईन तथा सीकेट सूत्र ।
1.3 संरचनात्मक विश्लेषण: कास्टिलियानोस प्रमेय । तथा II, धरण और कील सँधियुक्त कैंची में प्रयुक्त संगत विकृति की एकांक भार विधि, ढाल विक्षेप, आघूर्ण वितरण ।
वेलन भार और प्रभाग रेखाएँ : धारण के परिच्छेद पर अपरूपण बल तथा बंकन आघूर्ण के लिए प्रभाव रेखाएँ । गतिशील भार प्रणाली द्वारा धरण चक्रमण में अधिकतम अपरूपण बल तथा बंकन आघूर्ण हेतु मानदंड। सरल आर्लोबत समतल कील संधि युक्त केंची हेतु प्रभाव रेखाएँ ।
डाट: त्रिकील, द्विकील तथा आबद्ध डाट-पशुका लघीयन एवं तापमान प्रभाग ।
विश्लेषण की आव्यूह विधि: अनिर्धारित धरण तथा दृढ़ ढांचों का बल विधि तथा विस्थापन विधि से विश्लेषण ।
धरण और ढांचों का प्लास्टिक विश्लेषण: प्लास्टिक बंकन सिद्धांत, प्लास्टिक विश्लेषण, स्थैतिक प्रणाली; यांत्रिकी विधि।
असममित बंकन: जड़त्व आघूर्ण, जड़त्व उत्पाद, उदासीन अक्ष और मुख्य की स्थिति, बंकन प्रतिबल की परिगणना।
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संरचपस अभिकल्प: इस्पात, कंक्रीट तथा चिनाई संरचना
2.1 संरचनात्मक इस्पात अभिकल्प : संरचनात्मक इस्पात: सुरक्षा गुणक और भार गुणक कवचत तथा वेल्डित जोड़ तथा संयोजन तनाव तथा संपीडांग इकाइयों का अभिकल्प, संघटित परिच्छेद का धरण कवचित तथा वेल्डित प्लेट गर्डर, गैंदी गर्डर, बैटन एवं लेसिंगयुक्त स्टॅचयन्स ।
2.2 कंक्रीट तथा चिनाई संरचना का अभिकल्प: मिश्र अभिकल्प की संकल्पना, प्रबलित कंक्रीट : कार्यकारी प्रतिबल तथा सीमा अवस्था विधि से अभिकल्प-पुस्तिकाओं की सिफारिशें, वन-वे एवं टू-वे स्लैब की डिजाइन, सोपान स्लैब, आयताकार T एवं L काट का सरल एवं सतत धरण उत्केंन्द्रता सहित अथवा रहित प्रत्यक्ष भार के अंतर्गत संपीड़ांग इकाइयां विलगित एवं संयुक्त नीव केंटीलीवर एवं काउंटर फोर्ट प्ररूप प्रतिधारक भित्ति:
जलटंकी: पृथ्वी पर रखे आयताकार एवं गोलाकार टंकियों की अभिकल्पन आवश्यकताएं।
पूर्व प्रतिबलित कंक्रीट: पूर्व प्रतिबलित के लिए विधियां और प्रणालियां, स्थिरक स्थान, कार्यकारी प्रतिबल आधारित आनति के लिए परिच्छेद का विश्लेषण और अभिकल्प, पूर्व प्रतिबलित हानि।
- तरल यांत्रिकी, मुक्त वाहिका प्रवाह एवं द्रवचालित मशीनें
3.1 तरल यांत्रिकी: तरल गुणधर्म तथा तरल गति में उनकी भूमिका, तरल स्थैतिकी जिसमें समतल तथा वक़ सतह पर कार्य करने वाले बल भी शामिल हैं। तरल प्रवाह की शुद्धगतिकी एवं गतिकी: वेग और त्वरण, सरिता रेखाएं, सातत्य समीकरण, अघूर्णी तथा घूर्णी प्रवाह, वेग विभव एवं सरिता फलन सातत्य, संवेग एवं ऊर्जा समीकरण, नेवियर स्टोक्स समीकरण, आयलर गति समीकरण, तरल प्रवाह समस्याओं में अनुप्रयोग, पाइप प्रवाह, स्लूइस गेट, वियर ।
3.2 विमीय विश्लेषण एवं समरूपता: बकिंघम Pi-प्रमेय विमारहित प्राचल।
3.3 स्तरीय प्रवाह: समांतर, अचल एवं चल प्लेटों के बीच स्तरीय प्रवाह, ट्यूब द्वारा प्रवाह।
3.4 परिसीमा परत: चपटी प्लेट पर स्तरीय एवं विक्षुब्ध परिसीमा परत, स्तरीय उपपरत, मसृण एवं रूक्ष परिसीमाएं, विकर्ष एवं लिफ्ट ।
पाइपों द्वारा विक्षुब्ध प्रवाह: विक्षुब्ध प्रवाह के अभिलक्षण, वेग वितरण एवं पाइप घर्षण गुणक की विविधता, जलदाब प्रवणता रेखा तथा पूर्ण उर्जा रेखा ।
3.5 मुक्त वहिका प्रवाह: समान एवं असमान प्रवाह, आघूर्ण एवं ऊर्जा संशुद्धि गुणक, विशिष्ट ऊर्जा तथा विशिष्ट बल, क्रांतिक गहराई, तीव्र परिवर्ती प्रवाह, जलोच्छाल, क्रमशः परिवर्मी प्रवाह, पृष्ठ परिच्छेदिका वर्गीकरण, नियंत्रण काट, परिवर्ती प्रवाह समीकरण के समाकलन की सोपान विधि।
3.6 द्रवचालित यंत्र तथा जलशक्ति : द्रवचालित टरबाइन, प्रारूप वर्गीकरण, टर्बाइन चयन, निष्पादन प्राचल, नियंत्रण, अभिलक्षण, विशिष्ट गति जलशक्ति विकास के सिद्धान्त।
- भू-तकनीकी इंजीनियरी
मृदा के प्रकार एवं संरचना, प्रवणता तथा कण आकार वितरण, गाढ़ता सीमाएं ।
मृदा जल कोशिकीय तथा संरचनात्मक प्रभावी प्रतिबल तथा रंध्र जल दाब, प्रयोगशाला निर्धारण, रिसन दाब, बालु पंक अवस्था कर्तन-सामर्थ्य परीक्षण मोर कूलांब संकल्पना-मृदा संहनन-प्रयोगशाला एवं क्षेत्र परीक्षण संपीड्यता एवं संपिंडन संकल्पना-सपंडन सिद्धान्त-संपीड्यता स्थिरण विश्लेषण भूदाब सिद्धान्त एक प्रतिधारक भित्ति के लिए विश्लेषण, चादंरी स्थूणाभित्ति एवं बंधनयुक्त खनन के लिए अनुप्रयोग मृदा धारण क्षमता विश्लेषण के उपागम-क्षेत्र परीक्षण-स्थिरण विश्लेषण- भूगमन ढाल का स्थायित्व।
नींव-संरचना नींव के प्रकार एवं चयन मापदंड-नींव अभिकल्प मापदंड -पाद एवं पाइल प्रतिबल वितरण विश्लेषण, पाइप समूह कार्य पाइल भार परीक्षण भूतल सुधार प्रविधियां ।
संघ लोक सेवा आयोग मुख्य परीक्षा सिविल इंजीनियरी पेपर – 2 पाठ्यक्रम
- निर्माण तकनीकी, उपकरण, योजना और प्रबंध
1.1 निर्माण तकनीकी:
इंजीनियरी सामग्री: निर्माण सामग्री के निर्माण में उनके प्रयोग की दृष्टि से, भौतिक गुणधर्म : पत्थर, ईंट तथा टाइल, चूना, सीमेंट तथा विविध सुरखी मसाला एवं कंक्रीट लौह सीमेंट के विशिष्ट उपयोग, तंतु प्रबति C.C., उच्च सामर्थ्य कंक्रीट इमारती लकड़ी : गुणधर्म एवं दोष, सामान्य संरक्षण, उपचार कम लागत के आवास, जन आवास, उच्च भवनों जैसे विशेष उपयोग हेतु सामग्री उपयोग एवं चयन ।
1.2 निर्माण: ईंट, पत्थर, ब्लाकों के उपयोग के चिनाई सिद्धांत निर्माण विस्तारण एवं सामर्थ्य अभिलक्षण प्लास्टर, प्वाईंटंग, फ्लोरिंग, रूफिंग एवं निर्माण अभिलक्षणों के प्रकार, भवनों के सामान्य मरम्मत कार्य । रहिवासों एवं विशेष उपयोग के लिए भवन की कार्यात्मक योजना के सिद्धांत भवन कोड उपबंध । विस्तृत एवं लगभग आकलन के आधारभूत सिद्धांत-विनिर्देश लेखन एवं दर विश्लेषण-स्थावर । संपत्ति मूल्यांकन के सिद्धांत । मृदाबंध के लिए मशीनरी, कंक्रीटकरण एवं उनका विशिष्ट उपयोग उपकरण चयन को प्रभावित करने वाले कारक-उपकरणों की प्रचालन लागत ।
1.3 निर्माण योजना एवं प्रबंध: निर्माण कार्यकलाप कार्यक्रम निर्माण उद्योग को संगठन गुणता आश्वासन सिद्धांत । नेटवर्क के आधारभूत सिद्धांतों का उपयोग CPM एवं PERT के रूप में विश्लेषण : निर्माण मॉनीटरी, लागत इष्टतमीकरण एवं संसाधन नियतन में उनका उपयोग । आर्थिक विश्लेषण एवं विधि के आधारभूत सिद्धांत ।
परियोजना लाभदायकता– वित्तीय आयोजना के बूट उपागम के आधारभूत सिद्धांत सरल टौल नियतीकरण मानदंड।
- सर्वेक्षण एवं परिवहन इंजीनियरी
2.1 सर्वेक्षण: CE कार्य की दूरी एवं कोण मापने की सामान्य विधियां एवं उपकरण, प्लेन टेबल में उनका उपयोग, चक्रम सर्वेक्षण समतलन, त्रिकोणन, रूपलेखण एवं रथलाकृतिक मानचित्र, फोटोग्राममिति एवं दूर संवेदन के सामान्य सिद्धांत ।
2.2 रेलवे इंजीनियरी:
स्थायी पथ-अवयव, प्रकार एवं उनके प्रकार्य टर्न एवं क्रांसिंग के प्रकार्य एवं अभिकल्प घटक-ट्रैक के भूमितीय अभिकल्प की आवश्यकता-स्टेशन एवं यार्ड का अभिकल्प ।
2.3 राजमार्ग इंजीनियरी: राजमार्ग संरखन के सिद्धांत, सड़कों का वर्गीकरण एवं ज्यामितिक अभिकल्प अवयव एवं सड़कों के मानक नम्य एवं दृढ़ कुटिम हेतु कुट्टिम संरचना, कुटिम के अभिकल्प सिद्धांत एवं क्रियापद्धति प्ररूपी निर्माण विधियां एवं स्थायीकृत मृदा, WBM, बिटुमेनी निर्माण एवं CC सड़कों के लिए सामग्री सड़कों के लिए बहिस्तल एवं अधस्तल अपवाह विन्यास-पुलिया संरचनाएं कुट्टिम विक्षोभ एवं उन्हें उपरिशायी द्वारा मजबूती प्रदान करना । यातायात सर्वेक्षण एवं यातायात आयोजना में उनके अनुप्रयोग-प्रणालित, इंटरसेक्शन एवं घूर्णी आदि के लिए अभिकल्प विशेषताएं-सिगनल अभिकल्प मानक यातायात चिह्न एवं अंकन ।
- जल विज्ञान, जल संसाधन एवं इंजीनियरी
3.1 जल विज्ञान: जलीय चक्र, अवक्षेपण, वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, अंत:स्यदन, अधिभार प्रवाह, जलारेख, बाढ़, आवृत्ति विश्लेषण, जलाशय द्वारा बाढ़ अनुशीलन, वाहिका प्रवाह मार्गभिगमन-मस्किम विधि ।
3.2 भू-तल प्रवाह: विशिष्ट लब्धि, संचयन गुणांक, पारगम्यता गुणांक, परिरुद्ध तथा अपरिरुद्ध जलप्रवाही स्तर, एक्विटाई, परिरुद्ध तथा अपरिरुद्ध स्थितियों के अंतर्गत एक कूप के भीतर अरीय प्रवाह ।
3.3 जल संसाधन इंजीनियरी: भू तथा धरातल जल संसाधन, एकल तथा बहुउद्देशीय परियोजनाएं, जलाशय की संचयन क्षमता, जलाशय हानियाँ, जलाशय अवसादन ।
3.4 सिंचाई इंजीनियरी:
(क) फसलों के लिए जल की आवश्यकता : क्षयी उपयोग, कृति तथा डेल्टा, सिंचाई के तरीके तथा उनकी दक्षताएं ।
(ख) नहरें: नहर सिंचाई के लिए आबंटन पद्धति, नहर क्षमता, नहर की हानियाँ, मुख्य तथा वितरिका नहरों का संखन अत्यधिक दक्ष काट, अस्तरित नहरें, उनके डिजाइन, रिजीम सिद्धांत, क्रांतिक अपरूपण प्रतिबल, तल भार ।
(ग) जल-ग्रस्तता: कारण तथा नियंत्रण, लवणता ।
(घ) नहर संरचना: अभिकल्प, दाबोच्चता नियामक, नहर प्रपात, जलप्रभावी सेतु, अवनलिका एवं नहर विकास का मापन ।
(ङ) द्विपरिवर्ती शीर्ष कार्य पारगम्य तथा अपारगम्य नीवों पर बाधिका के सिद्धांत और डिजाइन, खोसला सिद्धांत, ऊर्जा क्षय ।
(च) संचयन कार्य: बांधों की किस्में, डिजाइन, दृढ़ गुरुत्व के सिद्धांत, स्थायित्व विश्लेषण ।
(छ) उत्प्लव मार्ग: उत्प्पलव मार्ग के प्रकार, ऊर्जा क्षय ।
(ज) नदी प्रशिक्षण: नदी प्रशिक्षण के उद्देश्य, नदी प्रशिक्षण की विधियां ।
- पर्यावरण इंजीनियरी
4.1 जल पूर्ति : जल मांग की प्रामुक्ति, जल की अशुद्धता तथा उसका महत्व, भौतिक, रासायनिक तथा जीवाणु विज्ञान संबंधी विश्लेषण, जल से होने वाली बीमारियाँ, पेय जल के लिए मानक ।
4.2 जल का अंतर्ग्रहण: जल उपचार : स्कंदन के सिद्धांत, ऊर्णन तथा सादन, मंदद्रुत, दाब फिल्टर, क्लोरीनीकरण, मृदुकरण, स्वाद, गंध तथा लवणता को दूर करना ।
4.3 वाहित मल व्यवस्था: घरेलू तथा औद्योगिक अपशिष्ट, झंझावात वाहित मल-पृथक और संयुक्त प्रणालियां, सीवरों द्वारा बहाव, सीवरों का डिजाइन ।
4.4 सीवेज लक्षण: BOD, COD, ठोस पदार्थ, विलीन ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और TOC, सामान्य जल मार्ग तथा भूमि पर निष्कासन के मानक ।
4.5 सीवेज उपचार: कार्यकारी नियम, इकाइयाँ, कोष्ठ, अवसादन टैंक, च्वापी फिल्टर, आक्सीकरण पोखर, उत्प्रेरित अवपंक प्रक्रिया, सैप्टिक टैंक, अवपंक निस्तारण, अवशिष्ट जल का पुन: चालन ।
4.6 ठोस अपशिष्ट: गांवों और शहरों में संग्रहण एवं विस्तारण, दीर्घकालीन कुप्रभावों का प्रबंध ।
- पर्यावरणीय प्रदूषण: अवलाबत विकास रेडियोएक्टिव अपशिष्ट एवं निष्कासन, उष्मीय शक्ति संयंत्रों, खानों, नदी घाटी, परियोजनाओं के लिए पर्यावरण संबंधी प्रभाव मूल्यांकन, वायु प्रदूषण, वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनिमय ।
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